Tuesday, 2 June 2026

पुस्तक समीक्षा : The Leader Narendra D. Modi : डॉ. चन्द्रमणि झा


वर्तमान भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हैं जिनके पक्ष और विपक्ष दोनों में तीव्र मतभेद दिखाई देते हैं। ऐसे समय में The Leader Narendra D. Modi जैसी पुस्तक केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं रह जाती, बल्कि वह समकालीन भारत की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक यात्रा का भी एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज बन जाती है। पुस्तक में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, कार्यशैली और राष्ट्र-निर्माण संबंधी दृष्टिकोण को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

इस पुस्तक के लेखक आदरणीय डॉक्टर चंद्रमणि झा मैथिली साहित्य-जगत के प्रतिष्ठित गीतकार एवं सांस्कृतिक चेतना के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी साहित्यिक संवेदनशीलता पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में दिखाई देती है। लेखक ने तथ्यों और घटनाओं को न केवल सूचनात्मक ढंग से रखा है, बल्कि उन्हें एक भावात्मक और प्रेरणात्मक स्वर भी प्रदान किया है। यही कारण है कि पुस्तक राजनीतिक विश्लेषण के साथ-साथ साहित्यिक पठनीयता भी बनाए रखती है।

पुस्तक का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह है कि लेखक ने नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व को केवल राजनीतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके संघर्ष, अनुशासन, संगठनात्मक क्षमता और जनसंपर्क कौशल को भी रेखांकित किया है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुँचने की यात्रा को लेखक ने प्रेरक आख्यान के रूप में प्रस्तुत किया है।

भाषा की दृष्टि से पुस्तक सरल और प्रवाहपूर्ण है। पुस्तक में घटनाओं का क्रमबद्ध विन्यास और सहज प्रस्तुति इसे सामान्य पाठकों से लेकर राजनीति एवं समाजशास्त्र के अध्येताओं तक के लिए उपयोगी बनाती है।हालाँकि, एक समीक्षक के रूप में यह भी कहा जा सकता है कि पुस्तक में मोदी के व्यक्तित्व और कार्यों के सकारात्मक पक्षों को अपेक्षाकृत अधिक स्थान मिला है। यदि आलोचनात्मक विमर्श और वैकल्पिक दृष्टिकोणों को भी कुछ अधिक विस्तार दिया जाता, तो पुस्तक का विश्लेषणात्मक पक्ष और अधिक सुदृढ़ हो सकता था। फिर भी लेखक का उद्देश्य स्पष्टतः नेतृत्व और प्रेरणा के आयामों को रेखांकित करना रहा है, और उस उद्देश्य में वे सफल दिखाई देते हैं।

समग्रतः The Leader Narendra D. Modi केवल एक राजनीतिक जीवनी नहीं, बल्कि नेतृत्व, संकल्प और राष्ट्र-सेवा के विचारों को समझने का एक गंभीर प्रयास है। आदरणीय चंद्रमणि झा जी ने अपनी साहित्यिक दृष्टि और संवेदनशील अभिव्यक्ति के माध्यम से इस पुस्तक को विशिष्ट बना दिया है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व,  उनके नेतृत्व-मॉडल और समकालीन भारत की राजनीतिक यात्रा को निकट से समझना चाहते हैं।

एक पाठक के तौर पर सर्वप्रथम तो मैं The Leader Narendra D. Modi के लिखे जाने की ही आलोचना करना चाहता हूँ। मेरी यह आलोचना पुस्तक की विषयवस्तु या उसके निष्कर्षों को लेकर नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व को लेकर है कि आखिर आदरणीय चंद्रमणि झा जी ने यह पुस्तक लिखी ही क्यों ? 

मेरी समझ में नरेंद्र मोदी पर लिखने के लिए आपमें कुछ न्यूनतम "अर्हताएँ" होनी चाहिए। जैसे - 

-  या तो लेखक स्वयं संघ-परिवार से जुड़ा हो, 
-  या फिर वो मोदी जी के गृहप्रदेश का हो,
-  या उनके साथ किसी संस्था में कार्यरत रहा हो, 
-  या फिर पेशे से पत्रकार हो जिसने वर्षों तक उनके राजनीतिक जीवन का अध्ययन किया हो। 

यहाँ कुछ लोग यह भी मान सकते हैं कि ऐसी पुस्तक लिखने के पीछे कोई राजनीतिक आकांक्षा या लाभ की संभावना होनी चाहिये, किंतु अफसोस कि चंद्रमणि झा जी इन अर्हताओं में से कोई भी नहीं रखते। वे न तो राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, न चुनावी विश्लेषक, न सत्ता के गलियारों के नियमित यात्री, न ही किसी प्रकार के राजनीतिक लाभ के आकांक्षी। वे मूलतः साहित्य के आदमी हैं - गीत के आदमी, संवेदना के आदमी, भाषा और संस्कृति के आदमी। ऐसे में उनका नरेंद्र मोदी पर पुस्तक लिखना उन लोगों के लिए आश्चर्य का विषय हो सकता है जो साहित्य और राजनीति के बीच कठोर दीवारें खड़ी करके देखते हैं।

लेकिन मेरी शिकायत यहीं समाप्त नहीं होती। एक मैथिल हृदय की शिकायत इससे भी बड़ी है। यदि चंद्रमणि झा जी को यह पुस्तक लिखनी ही थी, तो कम-से-कम इसे मैथिली में लिखते। जिस व्यक्ति ने अपना जीवन मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति की सेवा में लगाया हो, उनसे यह स्वाभाविक अपेक्षा की जा सकती है कि वह अपनी महत्वपूर्ण कृतियों के लिए अपनी मातृभाषा को प्राथमिकता दे। The Leader Narendra D. Modi का अंग्रेज़ी में प्रकाशित होना एक व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचने की दृष्टि से उचित हो सकता है, किंतु एक मैथिली प्रेमी के मन में यह प्रश्न अनायास उठता है कि क्या यह पुस्तक मैथिली में नहीं आ सकती थी?

फिर भी, जब पुस्तक को पढ़ना शुरू करता हूँ तो धीरे-धीरे यह शिकायत कम होने लगती है। तब समझ में आता है कि लेखक की वास्तविक अर्हता न तो राजनीतिक निकटता है, न वैचारिक प्रतिबद्धता और न ही कोई व्यक्तिगत स्वार्थ। उनकी सबसे बड़ी अर्हता है - एक सजग साहित्यकार की दृष्टि, जो अपने समय के प्रभावशाली व्यक्तित्वों और घटनाओं को समझने तथा उन्हें शब्द देने का साहस रखती है। संभवतः इसी अर्हता ने उन्हें इस पुस्तक को लिखने के लिए प्रेरित किया।

अब आते हैं पुस्तक की विषय-वस्तु पर। Crown Publication, छत्तीसगढ़ से प्रकाशित यह पुस्तक 278 पृष्ठों का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है। यद्यपि पुस्तक की सामग्री और परिश्रम इसे संग्रहणीय बनाते हैं, फिर भी मेरा मानना है कि इतने महत्त्वपूर्ण कार्य को हार्डबाउंड संस्करण तथा अधिक आकर्षक आवरण के साथ प्रस्तुत किया जाता तो इसकी गरिमा और बढ़ जाती। पुस्तक का विषय और उसका संदर्भ ऐसी प्रस्तुति की अपेक्षा करता है। पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यापक फलक है। कुल 77 आलेखों के माध्यम से लेखक ने नरेंद्र मोदी के जीवन, व्यक्तित्व, संघर्ष, नेतृत्व, प्रशासनिक दृष्टि, राष्ट्रवाद, वैश्विक छवि तथा सामाजिक सरोकारों सहित लगभग सभी महत्त्वपूर्ण पक्षों को समेटने का प्रयास किया है। यह कार्य निश्चय ही श्रमसाध्य और सराहनीय है।

नरेंद्र मोदी पर असंख्य पुस्तकें उपलब्ध हैं, किंतु अधिकांश पुस्तकें या तो जीवनी तक सीमित रह जाती हैं अथवा किसी एक विशेष पक्ष पर केंद्रित होती हैं। चंद्रमणि झा जी की यह कृति इस अर्थ में अलग दिखाई देती है कि इसमें विविध स्रोतों, प्रसंगों और दृष्टिकोणों को एक ही स्थान पर संकलित करने का प्रयास हुआ है। पाठक को मोदी के व्यक्तित्व और कृतित्व से संबंधित अनेक ऐसी सूचनाएँ एक साथ प्राप्त होती हैं, जिन्हें अन्यत्र खोजने के लिए अनेक पुस्तकों और स्रोतों का सहारा लेना पड़ सकता है।

पुस्तक का एक महत्त्वपूर्ण गुण इसकी संरचना है। 77 स्वतंत्र आलेख होने के बावजूद पुस्तक बिखरी हुई नहीं लगती। प्रत्येक आलेख एक बड़े व्यक्तित्व-चित्र का हिस्सा बनकर सामने आता है। पाठक चाहे किसी भी अध्याय से पढ़ना आरम्भ करे, वह अंततः नरेंद्र मोदी के जीवन और नेतृत्व की एक समग्र तस्वीर तक पहुँचता है।
लेखक का दृष्टिकोण स्पष्टतः सकारात्मक और प्रेरणात्मक है। वे मोदी को केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं जिसने साधारण पृष्ठभूमि से उठकर असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त कीं। इस कारण कई स्थानों पर पुस्तक जीवनी से अधिक प्रेरक साहित्य का रूप धारण करती दिखाई देती है। यद्यपि आलोचनात्मक विमर्श की अपेक्षा रखने वाले पाठकों को कुछ प्रश्न अनुत्तरित लग सकते हैं, फिर भी पुस्तक का घोषित उद्देश्य किसी राजनीतिक बहस को खड़ा करना नहीं, बल्कि एक नेतृत्व-यात्रा का दस्तावेज़ प्रस्तुत करना है।

सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि लेखक ने सूचनाओं को केवल संकलित नहीं किया है, बल्कि उन्हें साहित्यिक संवेदना और सहज भाषा के माध्यम से पाठक तक पहुँचाया है। यही कारण है कि पुस्तक तथ्य और भाव, दोनों के स्तर पर अपनी पठनीयता बनाए रखती है। नरेंद्र मोदी के संबंध में इतनी एकीकृत और व्यवस्थित सामग्री संभवतः अन्यत्र दुर्लभ है, और यही इस पुस्तक की सबसे बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है।

एक पाठक के रूप में पुस्तक को पढ़ते हुए यह अनुभव अवश्य होता है कि इसकी भाषा को और अधिक रोचक, संवादधर्मी तथा प्रवाहपूर्ण बनाया जा सकता था। लेखक का उद्देश्य स्पष्ट रूप से तथ्यों और सूचनाओं को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना रहा है, किंतु इसी कारण कई स्थानों पर भाषा अत्यधिक अकादमिक और विवरणप्रधान हो जाती है। परिणामस्वरूप सामान्य पाठक, जो किसी जीवनी या संस्मरणात्मक शैली की अपेक्षा लेकर पुस्तक के पास आता है, उसे कुछ अध्याय अपेक्षाकृत बोझिल अथवा नीरस प्रतीत हो सकते हैं। हालाँकि, इस पक्ष को पुस्तक की सीमा कहने के साथ-साथ उसकी विशेषता भी माना जा सकता है। लेखक ने रोचकता की अपेक्षा प्रामाणिकता और सूचना-संपन्नता को अधिक महत्व दिया है। यही कारण है कि पुस्तक भावनात्मक आख्यान की बजाय एक संदर्भग्रंथ और दस्तावेज़ का स्वरूप ग्रहण करती है।

इसलिए यदि कोई पाठक केवल साहित्यिक आनंद या कथा-सुख की अपेक्षा से इस पुस्तक को पढ़ना चाहता है, तो संभव है कि उसे कुछ निराशा हो। लेकिन यदि उसकी रुचि भारतीय राजनीति, समकालीन भारत, नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और कृतित्व अथवा इन विषयों पर गंभीर अध्ययन और शोध में है, तो यह पुस्तक उसके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। वस्तुतः नरेंद्र मोदी से संबंधित विविध सूचनाओं, विचारों, भाषणों और संदर्भों को एक ही स्थान पर संकलित करने के कारण यह पुस्तक शोधार्थियों, राजनीतिक अध्येताओं और गंभीर पाठकों के लिए एक अनिवार्य संदर्भ-दस्तावेज़ के रूप में देखी जा सकती है।

दरअसल The Leader Narendra D. Modi केवल एक नेता की जीवनी नहीं, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक व्यक्तित्व को समझने का प्रयास है जिसने इक्कीसवीं सदी के भारत की दिशा और विमर्श को गहराई से प्रभावित किया है। चंद्रमणि झा की यह कृति अपने विषय की व्यापकता, सामग्री की समृद्धि और दस्तावेज़ी महत्व के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

इस पुस्तक की एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि इसकी सहज उपलब्धता है। आज के समय में किसी पुस्तक का अच्छा होना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक उसका पाठकों तक पहुँचना भी है। प्रसन्नता की बात है कि The Leader Narendra D. Modi अमेज़न, फ्लिपकार्ट, किंडल तथा गूगल बुक्स जैसे प्रमुख मंचों पर उपलब्ध है। दुर्भाग्यवश मैथिली के अधिकांश लेखक और प्रकाशक अपनी पुस्तकों के वितरण और विपणन को इस स्तर तक नहीं पहुँचा पाते हैं। इस दृष्टि से भी यह पुस्तक एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

एक मैथिल पाठक के रूप में, और विशेषकर लेखक के साहित्यिक अवदान से परिचित होने के कारण, इस पुस्तक को देखकर मुझे एक स्वाभाविक गर्व-बोध होता है। मैथिली गीत-साहित्य के शिखर पुरुषों में गिने जाने वाले आदरणीय चंद्रमणि झा जी का इस प्रकार राष्ट्रीय स्तर के विषय पर अंग्रेज़ी में एक सुव्यवस्थित और व्यापक पुस्तक प्रस्तुत करना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि मैथिली समाज और साहित्य-जगत के लिए भी गौरव का विषय है।

पुस्तक के साथ एक अप्रत्याशित किंतु महत्त्वपूर्ण लाभ यह भी जुड़ा हुआ है कि इसके बहाने पाठक स्वयं लेखक से परिचित हो पाता है। पुस्तक में चंद्रमणि झा जी का परिचय विस्तार से दिया गया है, जिसे पढ़ते हुए उनके साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान की व्यापकता का अनुमान होता है।

समग्रतः The Leader Narendra D. Modi एक ऐसी कृति है जो अपने विषय, सामग्री और दस्तावेज़ी महत्त्व के कारण विशेष ध्यान आकर्षित करती है। इसमें कुछ सीमाएँ अवश्य हैं, किंतु इसकी उपलब्धियाँ उन सीमाओं से कहीं अधिक बड़ी हैं। यह पुस्तक नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और विचारों को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए उपयोगी है ही, साथ ही यह इस बात का भी प्रमाण है कि एक संवेदनशील साहित्यकार अपने समय के ऐसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति पर गंभीर और श्रमसाध्य कार्य कर सकता है जो साहित्य से ईतर है... राजनीति, खेल, सिनेमा आदि आदि.

अंत में आदरणीय चंद्रमणि झा जी को इस महत्त्वपूर्ण कृति के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। मेरी कामना है कि यह पुस्तक देश-विदेश के अधिकाधिक पाठकों तक पहुँचे, पढ़ी जाए, चर्चा में आए और अपने उद्देश्य की सार्थकता सिद्ध करे। साथ ही, यह कृति मैथिली समाज को भी प्रेरित करे कि उसकी साहित्यिक प्रतिभाएँ क्षेत्रीय सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करें।

Praveen Kumar
समीक्षक
पाठकों के लिए बोनस
695 रुपये मूल्य की यह पुस्तक फ़िलहाल अमेजन पर 521 रुपये में उपलब्ध है . 

3 comments:

  1. Anonymous6/02/2026

    आप जैसा लेखक अगर पुस्तक की समीक्षा करते हैं तो अवश्य अच्छा होगा।

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  2. Bibhash Chaudhary6/02/2026

    Bahut sundar

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  3. Anonymous6/02/2026

    सुपर 🌹❤️🙏

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